अदालती आदेशों के बावजूद अहमदाबाद में नहीं हट रहा कचरे का पहाड़

अहमदाबाद। शहर की सबसे बड़ी लैंडफिल साइट पिराना डंप साइट से कचरे के पहाड़ को हटाने की प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है। गुजरात उच्च न्यायालय और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के स्पष्ट आदेशों के बावजूद अब तक कचरे का पहाड़ पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सका है।

कोर्ट के आदेश के अनुसार पिराना स्थित कचरा पहाड़ वर्ष 2021 तक शून्य हो जाना चाहिए था, लेकिन आदेश के छह वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी 50 प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हटाया गया कचरा केवल नेशनल हाईवे और पिराना जाने वाली सड़क की ओर से ही हटाया गया है, जबकि रिहायशी क्षेत्रों की ओर कचरे का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है।

रिहायशी इलाकों के पास बढ़ रहा कचरा

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अहमदाबाद नगर निगम केवल दिखावटी कार्रवाई कर रहा है। रिहायशी क्षेत्रों की ओर स्थित कचरे के पहाड़ का आकार कम होने के बजाय बढ़ रहा है क्योंकि नगर निगम अब भी आवासीय इलाकों के पास कचरा डंप कर रहा है।

आरोप है कि नगर निगम द्वारा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 का पालन नहीं किया जा रहा। नियमों के अनुसार कचरा डंपिंग साइट रिहायशी क्षेत्र से कम से कम 200 मीटर दूर होनी चाहिए, लेकिन मेमन कॉलोनी और सिटीजन नगर के पास कचरा डंप किया जा रहा है।

2017 में दायर हुई थी जनहित याचिका

इस लैंडफिल को हटाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता कलीम सिद्दीकी ने वर्ष 2017 में गुजरात हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इसके बाद 2019 में अदालत ने एक वर्ष के भीतर डंप साइट को पूरी तरह समाप्त करने का निर्देश दिया था। हाई कोर्ट के अलावा एनजीटी ने भी लैंडफिल हटाने के आदेश दिए थे, फिर भी अब तक साइट शून्य नहीं हो सकी।

नगर निगम को कई बार लिखा गया पत्र

कलीम सिद्दीकी ने कई बार अहमदाबाद नगर निगम को पत्र लिखकर रिहायशी क्षेत्र से 200 मीटर का दायरा खाली करने और नियमों के पालन की मांग की थी। कार्रवाई न होने पर उन्होंने गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढ़वादिया से भी हस्तक्षेप की मांग की।

इस मामले में गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने स्थल का निरीक्षण कर अहमदाबाद नगर निगम को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

(जनचौक ब्यूरो)

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